Thursday, 6 June 2013

KUNDALI MILAN VICHAR

भावी दम्पति का वैवाहिक जीवन वैचारेक्य, सुख समृ्द्धि एवं वंशवृ्द्धि से परिपूर्ण हो. इसके लिए हिन्दु वैवाहिक परम्परा एवं मान्यता के अनुसार वर-कन्या की जन्मकुंडली का सम्यक मिलान किया जाता है. जिसके आधार पर यह निर्धारित तथा सुनिश्चित किया जाता है कि विवाहोपरांत दम्पति के मध्य मैत्री, सामंजस्य तथा सुख-समृ्द्धि की कैसी स्थिति रहेगी. विवाह से पूर्व, जन्मपत्रिका मिलान द्वारा भावी वैवाहिक जीवन का आंकलन करना तो अपने आप में एक दुष्कर ज्योतिषीय प्रक्रिया है. उस प्रक्रिया के बारे में यहाँ लिखने का तो कोई औचित्य ही नहीं... इस पोस्ट में तो मिलान सम्बंधी एक दो बातों पर प्रकाश डालना ही हमारा उदेश्य है. इस बात को तो ज्योतिष की नाममात्र जानकारी रखने वाला व्यक्ति भी जानता है कि फलित ज्योतिष में प्रमुखत: जन्मलग्न की ही प्रधानता होती है.लेकिन विवाह हेतु संभावित वर-वधू की जन्मकुंडली मिलान करते समय जन्मराशी ही मेलापक का मूल आधार बनती है.जन्मकालीन चन्द्रमा की नक्षत्र स्थिति के आधार पर मेलापक सम्बंधी निर्णय लिए जाते हैं. लेकिन आजकल ऎसा भी बहुत देखने में आता है कि जहाँ पर वर-कन्या की जन्मकुंडलियाँ सुलभ नहीं होती अथवा कहें कि जन्मविवरण (जन्मतिथि/समय/स्थान) के अभाव में जन्मपत्रिका का निर्माण संभव नहीं है तो वहाँ पर, ज्योतिषी द्वारा प्रचलित नाम के प्रथम अक्षर को आधार मानकर जन्मनक्षत्र का निर्धारण करके मिलान का निर्णय ले लिया जाता है. वास्तव में यह एक पूरी तरह से कामचलाऊ आधार है,जिसके लिए यदि साधारण भाषा मे "जुगाड" शब्द का प्रयोग किया जाए तो शायद ज्यादा सही रहेगा. क्यों कि इसे किसी भी तरीके से न तो शास्त्र सम्मत कहा जा सकता है और न ही तर्कसम्मत. मेरा अपना निजी मत तो ये है कि अगर वर-कन्या की जन्मपत्रिका नहीं है या उनमें से किसी का जन्मविवरण उपलब्ध नहीं है तो फिर इस प्रकार ऊलजलूल अतार्किक तरीके अपनाकर मिलान का स्वांग रचने से तो कहीं बेहतर है कि विवाह बिना मिलान किए ही कर लेना चाहिए......इस प्रकार के तरीके अपनाकर किसी को भ्रमितकर धन कमाने वाले ज्योतिषियों द्वारा इस विद्या के व्यापारिक दुरूपयोग के चलते ही ज्योतिष की विश्वसीनता पर बारबार प्रश्नचिन्ह खडे किए जाते रहे हैं.
दूसरी बात, वो ये कि आजकल जन्मकुंडली मिलान वगैरह के लिए भी कम्पयूटर का ही सहारा लिया जाने लगा है. खैर इसमें कोई बुराई नहीं बल्कि ये तो अच्छी बात है क्यों कि कम्पयूटर के इस्तेमाल से गलती की कैसी भी कोई संभावना नहीं रहती...... परन्तु अन्तिम निर्णय तो विद्वान ज्योतिषी को ही करना होता है. कम्पयूटर का कार्य है सिर्फ गणित(Calculations) करना. जन्मकुंडली देखना, उसके बारे में अन्तिम रूप से सारांशत: व्यक्तिगत रूचि लेकर किसी निर्णय पर पहुँचने का कार्य ज्योतिष के ज्ञाता का है. कम्पयूटर मानव कार्यों का एक सर्वोतम सहायक जरूर है, मानव नहीं.....इसलिए कम्पयूटर का उपयोग करें तो सिर्फ जन्मकुंडली निर्माण हेतु....न कि कम्पयूटर द्वारा दर्शाई गई गुण मिलान संख्या को आधार मानकर कोई अंतिम निर्णय लिया जाए...





SAMPLE KUNDALI MILAN-M0




SAMPLE KUNDALI MILAN-M1






Monday, 3 June 2013

CHOGARIA TATKAL MUHURAT

किसी भी कार्य को शुभ मुहूर्त या समय पर प्रारंभ किया जाए
तो परिणाम अपेक्षित आने की संभावना ज्यादा प्रबल होती है।
यह शुभ समय चौघड़िया में देखकर प्राप्त किया जाता है।
यहां हमने चौघिड़या देखने की सुविधा उपलब्ध कराई है।
सेतकरविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि
6:00 AM7:30 AMउद्बेगअमृतरोगलाभशुभचरकाल
7:30 AM9:00 AMचरकालउद्बेगअमृतरोगलाभशुभ
9:00 AM10:30 AMलाभशुभचरकालउद्बेगअमृतरोग
10:30 AM12:00 PMअमृतरोगलाभशुभचरकालउद्बेग
12:00 PM1:30 PMकालउद्बेगअमृतरोगलाभशुभचर
1:30 PM3:00 PMशुभचरकालउद्बेगअमृतरोगलाभ
3:00 PM4:30 PMरोगलाभशुभचरकालउद्बेगअमृत
4:30 PM6:00 PMउद्बेगअमृतरोगलाभशुभचरकाल
- शुभ- अमृत- लाभ
सेतकरविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि
6:00 PM7:30 PMशुभचरकालउद्बेगअमृतरोगलाभ
7:30 PM9:00 PMअमृतरोगलाभशुभचरकालउद्बेग
9:00 PM10:30 PMचरकालउद्बेगअमृतरोगलाभशुभ
10:30 PM12:00 AMरोगलाभशुभचरकालउद्बेगअमृत
12:00 AM1:30 AMकालउद्बेगअमृतरोगलाभशुभचर
1:30 AM3:00 AMलाभशुभचरकालउद्बेगअमृतरोग
3:00 AM4:30 AMउद्बेगअमृतरोगलाभशुभचरकाल
4:30 AM6:00 AMशुभचरकालउद्बेगअमृतरोगलाभ
विशेष-दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
 समयानुसार चौघड़िया को तीन भागों में बांटा जाता है शुभ, मध्यम और अशुभ चौघड़िया।
 इसमें अशुभ चौघड़िया पर कोई नया कार्य शुरु करने से बचना चाहिए।
शुभ चौघडियाशुभ (स्वामी गुरु), अमृत (स्वामी चंद्रमा), लाभ (स्वामी बुध)
मध्यम चौघडियाचर (स्वामी शुक्र)
अशुभ चौघड़ियाउद्बेग (स्वामी सूर्य), काल (स्वामी शनि), रोग (स्वामी मंगल)

VASTU VICHAR

vastu shastra 

ND

विधाता ने संसार में प्रत्येक मनुष्य को सिर छुपाने का कोई न कोई स्थान अवश्य प्रदान किया है। बहुत से लोग भाग्य के धनी होते हैं और बहुत से अपने कर्म द्वारा भाग्य का निर्माण करते हैं। कोई बड़े बंगलें या कोठी में रहता है तो कोई छोटे-मोटे घर में रहता है या ऊंचे बड़े फ्लैट के अपार्टमेंट में। किन्तु रहने का स्थान किसी के लिए लाभदायक साबित होता है तो किसी के लिए हानिकारक।

जिस प्रकार घरों में रहने वालों को फेंगशुई से सहायता मिलती है, उसी प्रकार फ्लैटों में रहने वालों के लिए फेंगशुई उपयोगी है। फेंगशुई का प्रयोग कर कोई भी अपार्टमेंट में प्रकृति के साथ सामंजस्य कर सुखपूर्वक रह सकता है।

जब आप रहने के लिए किसी अपार्टमेंट का चुनाव करें तो पहले यह देखें कि अपार्टमेंट किस स्थान पर बना हुआ है। उसके आसपास का क्षेत्र किस प्रकार का है। हमारे भारतीय वास्तु से फेंगशुई वास्तु में काफी अन्तर है। यदि आप फेंगशुई का आश्रय ले रहे हैं, तो उसी के दृष्टिकोण से आपको अपार्टमेंट का निरीक्षण करना होगा।

ND
आप देखें कि अपार्टमेंट भूखंड पर अकेला खड़ा है या उसके आसपास अन्य अपार्टमेंट्स भी हैं। उनकी ऊंचाइयां समान हैं या आपके पसंदीदा अपार्टमेंट से कम या अधिक ऊंचे अपार्टमेंट आपके द्वारा चुने गए अपार्टमेंट के लिए अशुभ और घातक हो सकते हैं। यह स्थिति उस समय तो और भी घातक हो सकती है जब अधिक ऊंचे अपार्टमेंट के प्रवेश मार्ग के समीप हो। 

प्रवेश मार्ग के समीप बड़ा होर्डिंग, ट्यूबवेल या कोई ऊंची पहाड़ी इत्यादि भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इनसे फ्लैट में जाने वाली
लाभदायक 'वी' प्रभावित होती है। इसलिए आपका अपार्टमेंट हर ओर से सुरक्षित होना चाहिए तथा फेंगशुई के स्तर पर खरा उतरना चाहिए।

जो अपार्टमेंट किसी पहाड़ी पर अकेला खड़ा होता है, उसकी स्थिति भी अच्छी नहीं होती, क्योंकि उसके समीप से चलती वायु अपार्टमेंट में प्रवेश करने वाली समस्त लाभदायक 'वी' को अपने साथ उड़ाकर ले जाती है। फ्लैटों में रहने वाले लोग उस लाभदायक वायु से सर्वथा अछूते रह जाते हैं। ऐसे अपार्टमेंट नकारात्मक 'वी' की रचना करते हैं

Saturday, 1 June 2013

PT.BAL KISHAN PUROHIT

Dr.B.K.Purohit
(Gold Medalist  &Ph.D in Astrology
ज्योतिष शिरोमणी ,ज्योतिष रतन, ज्योतिष शास्त्री  
K.P.ASTROLOGER Madras &Medical Astrology 
 आर्यभट व् वराह मिहिर पुरस्कार प्राप्त 

Dr.B.K.Purohit

Dr.B.K.Purohit